दिल मांगे मोर
कहते है मुकद्दर पे लिखा तो कोइ बदल नही सकता ,लेकिन जब मै यात्रा वृतान्त लेकर मोबाइल से अपडेट करते रह्ता हु तो मेरे हर फोटो ब्लग मे कहानी बन कर उभरकर आती है गिरीनगर कल्काजी दिल्ली ,ये मेरी छोटी सी गाव ,और मै ठहरा एक जोगी जो घुम् ता हु ,मुस्कुरा कर हर दिन को सम्भाल कर तस्बिर कैद करता हु।मेरे सामने मा का चेहरा बन जाति है वो नुरानी भाव जिस से मेरी जिन्दगि सिर्जित हो गई है ।
आज है प्रेम दिवस ,और मुझे याद है हर वो दोस्त जिसने मुझे प्यार किया अपने से ज्यादा । इसलिए मुस्कुराहत के मिठे बोल से मै हमेसा तस्बिरो मै खोया खोया रह्ता हु।आज के दिन सभी को मेरा नमन और प्यार ।मुझे याद है मेरी कुल्लु मनाली के हर पल जो हिम वर्षा पहाड मैने महसुस कि वो बेमिसाल यादे बन कर मेरी साथ है ।चाहे पशुपतिनाथ के दर्शन का मौका हो या राजस्थान कि यात्रा हर जगह दिल मांगे मोर।

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