माता कालकाजी कि जय
मा कालकाजी ,'काली' का अर्थ है समय और काल। काल, जो सभी को अपने में निगल जाता है। भयानक अंधकार और श्मशान की देवी। वेद अनुसार 'समय ही आत्मा है, आत्मा ही समय है'। मां कालिका की उत्पत्ति धर्म की रक्षा और पापियों-राक्षसों का विनाश करने के लिए हुई है।
काली को माता जगदम्बा की महामाया कहा गया है। मां ने सती और पार्वती के रूप में जन्म लिया था। सती रूप में ही उन्होंने 10 महाविद्याओं के माध्यम से अपने 10 जन्मों की शिव को झांकी दिखा दी थी।
दिल्ली के कालकाजी इलाके में स्थित कालकाजी मंदिर माता काली को समर्पित है जिन्हे दुर्गा का अवतार माना जाता है। यह एक ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर है मंदिर में काले और सफेद पत्थर लगे हैं। साउथ दिल्ली स्थित कालकाजी मंदिर बेहद प्राचीन मंदिर है। ये मंदिर देश के प्राचीनतम सिद्धपीठों में से एक है। मां के भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं। कालका काली का ही दुसरा नाम है। इस मंदिर को जयंती पीठ और मनोकामना सिद्ध पीठ भी कहा जाता है। इस पीठ का अस्तित्व अनादि काल से माना गया है और हर काल में इस जगह का स्वरुप बदला है। ऐसी मान्यता है कि काली मां ने असुरों के संहार के लिए अवतरित हुई थी।
तब से यह मनोकामना सिद्धपीठ के रूप में विख्यात है। मौजूदा मंदिर उनके परम भक्त बाबा बालक नाथ ने स्थापित किया था। मंदिर जाने के लिए आप मेट्रो का प्रयोग कर सकते हैं। कालका जी मैट्रो स्टेशन दिल्ली मेट्रो की वायसेट लाइन पर पड़ता है। मंदिर का गर्भगृह 12 तरफ़ा है जिसमें प्रत्येक पक्ष पर संगमरमर से सुसज्जित एक प्रशस्त गलियारा है। यहाँ गर्भगृह को चारों तरफ से घेरे हुए एक बरामदा है जिसमें 36 धनुषाकार मार्ग हैं।हालांकि मंदिर में रोज़ पूजा होती है पर नवरात्री के त्यौहार के दौरान मंदिर में उत्सव का माहौल होता है।

Comments
Post a Comment