दिल्ली यात्रा वृतान्त

गिरीनगर दिल्ली एक ऐसा नाम   है जो गुन्ज ति रहती है । इसलिए मै हमेसा दिल्ली कि हर गल्लि घूमते रह्ता हु ,शोध एवं अनुसंधान के उद्देश्य से अनेक अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक व्यक्तिगत रूप में सिख धर्म के विभिन्न पहलुओं पर रिसर्च करने के लिए पावन स्थल का दौरा करते हैं।गुरुद्वारा बंगला साहिब में स्थित दिल्ली का पहला मल्टीमीडिया म्यूजियम अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को सिख धर्म की विस्तृत जानकारी प्रदान करने का सबसे सुगम तथा बड़ा स्त्रोत बन गया है. इस म्यूजियम में पेंटिंग डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्क्रीन भित्ति-चित्र, चित्रपट, तथा विभिन्न भाषाओं के माध्यम से सिख धर्म के मूल सिद्धांतों की जानकारी प्रदान की जाती है।

भारत की राजधानी दिल्ली यमुना नदी के किनारे स्थित है और यह 1483 वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैली है। दिल्ली उत्तर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र है और यहां की संस्कृति यहां के महत्वपूर्ण इतिहास से प्रभावित है। पुरानी दिल्ली सन् 1638 में उंचे पत्थरों से बनी दीवार से घिरी है। यहां सात दरवाजों से पहुंचा जा सकता है, जिसमें दक्षिण का दिल्ली गेट, पूर्व में अजमेरी गेट और उत्तर में कश्मीरी गेट शामिल है। इन दीवारों के बीच संकरी सड़कें और गलियां, व्यस्त बाज़ारों की भूलभूलैया है और देश के शानदार इंडो-मुस्लिम वास्तुशिल्प के नमूने हैं। दिल्ली भारतीय संस्कृति की सच्ची तस्वीर दिखाती है। यह बहुत आसानी से पारंपरिक और आधुनिक संस्कृतियों मेें मिल जाती है। 

दिल्ली का सांस्कृतिक जीवन यहां की आबादी के महानगरीय चरित्र से बहुत प्रभावित रहा है जो देश और दुनिया के कई हिस्सों से आता है और अलग अलग पृष्ठभूमि का है। इसमें से ज्यादातर तो पश्चिमी संस्कृति से अपनाया गया है और अपनाने की यह प्रक्रिया आजादी के बाद से आधुनिक मास मीडिया के चलते तेजी से बढ़ी है। हालांकि टेलीविज़न ने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय हितों के प्रति जागरुकता में मदद की है।  दिल्ली की अपनी कोई क्षेत्रीय भाषा नहीं है, विभिन्न संस्कृतियों की तरह इसने देश की विभिन्न भाषाएं भी अपना ली हैं। यहां आम तौर पर बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेजी हैं। हिंदी यहां की मुख्य भाषा है क्योंकि ज्यादातर आबादी यह भाषा बोलती है, हालांकि उसकी बोलियां अलग अलग हैं। 

 दिल्ली यात्रा वृतान्त 


लक्ष्मी नारायण मंदिर: बिरला मंदिर के नाम से प्रसिद्ध, उड़ीसा शैली में 1938 में निर्मित यह विशाल हिन्दू मंदिर प्रख्यात बिरला परिवार द्वारा बनवाया गया था। इस मंदिर में सभी धर्म के अनुयायी पूजा-अर्चना कर सकते हैं। 

कुतुब मीनार: कुतुब मीनार अफ़गान वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह मीनार 72.5 मीटर ऊंचा वायसरायटावर है, जिसका निर्माण कार्य 12वीं शताब्दी के अंतिम वर्ष में कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा आरंभ कराया गया था, जिसे बाद में उसके उत्तराधिकारी द्वारा पूरा किया गया। इसे विश्व विरासत वाले स्थान का दर्ज़ा दिया गया । 
बहाई मंदिर: कालकाजी पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर को इसके संगमरमर से बने विशिष्ट कमल के फूल के आकार के कारण "लोटस टैम्पल" के नाम से भी जाना जाता है।इसका निर्माण 1987 में बहाई सम्प्रदाय के अनुयायियों द्वारा कराया गया था। यह मंदिर शुद्धता और सभी धर्मों की समानता का प्रतीक है।  

धी स्मृति: गांधी स्मृति: इस स्मारक में शामिल हैं: (क) महात्मा गांधी की स्मृतियों और उनके विचारों को दर्शाने के लिए विजुअल आस्पेक्ट, (ख) गांधी को एक महात्मा बनाने वाले जीवन मूल्यों पर ध्यानाकर्षण पर केन्द्रित शैक्षणिक आसपेक्ट, और (ग) कुछ महसूस की जाने वाली आवश्यकताओं के अनुपालन में गतिविधियों की शुरुआत के लिए सर्विस आसपेक्ट।

संग्रहालय में महात्मा गांधी द्वारा यहां बिताए गए वर्षों के दौरान लिए गए फोटोग्राफ़, मूर्तियां, पेंटिंग, फ्रेस्कॉस, शिलालेख और उपयोग की गई वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। गांधीजी की व्यक्तिगत वस्तुओं को यहां सावधानीपूर्वक सहेज कर रखा गया है।

राजघाट: काले संगमरमर का एक साधारण चौकोर पत्थर उस स्थान पर लगा है, जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अंतिम संस्कार किया गया था।

हुमायूं का मकबरा: इस स्मारक का निर्माण, हुमायूं की विधवा, रानी हाजी बेगम द्वारा 16वीं शताब्दी में कराया गया था, इसे आगरा स्थित ताजमहल की नकल माना जाता है। 

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