दिल्ली

कहते है दिल का रिस्ता हमेसा जुबानपे  झलकता नही ,ये ऐसे लम्हे सरोजता है जो यादगार रह्ते है जिन्दगि को हसिन बनाने के लिए ।दिल्ली  कि आवाज गिरीनगर बन के गिरीनगर जो गित सुनाती है वो लाजवाफ है ।गिरीनगर एक ऐसा गाव जिसमे है  अलग अलग छाव धुप ,जब गली न एक के नुक्कड़ पे कोइ खडा होकर गुरुद्वारा को नमन करता है तो अर्दास आपके मन को शान्त कर देता है ,कहते  है सन्त कबिर के दोहो के जादु मे दिल्ली झुमती है और गोविन्दपुरी मार्केट मधुर संगीत मे लोट्पोत होकर ठहाके लगाती है । भिड को सम्भालती गोविन्दपुरी गुञ्जन लेके चल देती है सी आर पार्क तरफ जहाँ पे शोर मचाति भिड ठहका लगाती है पान के स्वाद के साथ फिर घुम जाति है लाजपत् नगर कि तरफ जहाँ पे खडी छोटे छोटे  रिक्सा मे वैठ कर हसते हुए लोग भिड बन जाते है दिल्वालो कि दिल्ली सजाने को ,क्यु कि इसी पल मे दिल्ली अपने आप को निहारती है ।क्यु घुम्ने जाते है लोग दिल्ली ये सवाल मेरे मन मे हमेशा उठ्ता रहा है ,जानकार लोग कहते है दिल्ली दिल्वालो कि है ,लोग मस्त मगन घुम्ते है ,छोटी छोटी बातो मे दिल्ली थिरकती है जैसे  सितार के राग दिल्ली मे मगन है ।प्राचीन नगर होने के कारण इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। अनेक प्रकार के संग्रहालय और बाज़ार हैं जो दिल्ली घूमने आने वालों का दिल लूट लेते हैं। छतरपुर मंदिर दिल्ली के सबसे बड़े और सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में एक है। यह मंदिर गुंड़गांव-महरौली रोड पर स्थित है। यहां एक पेड़ है जहां श्रद्धालु धागे और रंग-बिरंगी चूड़ियां बांधते हैं। लोगों का मानना है कि ऐसा करने से मनोकामना पूर्ण होती है। राजपथ पर स्थित इंडिया गेट का निर्माण प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध में मारे गए 90000 भारतीय सैनिकों की याद में कराया गया था। 160 फीट ऊंचा इंडिया गेट दिल्ली का पहला दरवाजा माना जाता है। जिन सैनिकों की याद में यह बनाया गया था उनके नाम इस इमारत पर खुदे हुए हैं। इसके अंदर अखंड अमर जवान ज्योति भी जलती रहती है।दिल्ली मस्तानी सी बनकर  फिर से पुकारती है सबको ,इसके छाव मे लोग कहते है दिल्ली दिल्वालो कि ।

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