कहते है दिल का रिस्ता हमेसा जुबानपे झलकता नही ,ये ऐसे लम्हे सरोजता है जो यादगार रह्ते है जिन्दगि को हसिन बनाने के लिए ।दिल्ली कि आवाज गिरीनगर बन के गिरीनगर जो गित सुनाती है वो लाजवाफ है ।गिरीनगर एक ऐसा गाव जिसमे है अलग अलग छाव धुप ,जब गली न एक के नुक्कड़ पे कोइ खडा होकर गुरुद्वारा को नमन करता है तो अर्दास आपके मन को शान्त कर देता है ,कहते है सन्त कबिर के दोहो के जादु मे दिल्ली झुमती है और गोविन्दपुरी मार्केट मधुर संगीत मे लोट्पोत होकर ठहाके लगाती है । भिड को सम्भालती गोविन्दपुरी गुञ्जन लेके चल देती है सी आर पार्क तरफ जहाँ पे शोर मचाति भिड ठहका लगाती है पान के स्वाद के साथ फिर घुम जाति है लाजपत् नगर कि तरफ जहाँ पे खडी छोटे छोटे रिक्सा मे वैठ कर हसते हुए लोग भिड बन जाते है दिल्वालो कि दिल्ली सजाने को ,क्यु कि इसी पल मे दिल्ली अपने आप को निहारती है ।क्यु घुम्ने जाते है लोग दिल्ली ये सवाल मेरे मन मे हमेशा उठ्ता रहा है ,जानकार लोग कहते है दिल्ली दिल्वालो कि है ,लोग मस्त मगन घुम्ते है ,छोटी छोटी बातो मे दिल्ली थिरकती है जैसे सितार के राग दिल्ली मे मगन है...