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पाशुपत

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दादि और दादि कि कहानिया सुनते सुनते चले धकाल्थोक स्यांग्जा मेरा गाऊ जी पंच्मुल है नाम जी चले चलो पाशुपत क्षेत्र शिवरात्रि आ गइ घुम घुम के मन्दिर शिव को याद करो जी चलो चलो हो  जी धकल्थोक भी हो  जी चले चले पाशुपत क्षेत्र स्यांग्जा भी हो  जी कहत बुजुर्ग सुन भाई तामांग सेलो भी प्यारा देउरा नाच भी प्यारा चले चले धकल्थोक अब नेपाल नेपाल करते करते पर्यटन भी हो जी ये है हमारी पाशुपत चले चले अब पाशुपत

गिरीनगर

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मधुर मधुर बोलि से गुन्ज रही गिरीनगर पल पल मुस्कान देते हुए चलि गिरीनगर दिल्ली दिल्ली कहते हुए गुन्ज रही गिरीनगर मै बोलु बोल गिरीनगर क्यु गुन्ज रही हो गिरीनगर नुक्कर एक  गोविन्दपुरी बोले सुन तु अर्दास अब करते हुए नमन मुझे मै खोलू राज क्यु तु है खास गिरीनगर नही नही ठण्ड मै शिवरात्रि तैयार बोलु बम बम भोले गिरीनगर जटा धारी शिवजी है प्रिय मुझे क्यु न खोलू राज क्यु खास है गिरीनगर बिन्ति करु करु पुजन नागबाबा शिवजी भोले राख लगाके कानन कुण्डल डोले नाग गले से बिन्ति करु मै गिरीनगर क्यु नाचे मन्द गति से क्यु बोलु तु है खास गिरीनगर

गोविन्दपुरी

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मन्दाकिनी जैसी चाल चल्ती गोविन्दपुरी और मै एक बेगाना सा भिड पात्र,ठण्ड के मौसम होती हुई बारिश कि तरह गोविन्दपुरी कि बाते मनको चंचल करती है। बोर्ड पे लिखा नोटिस दिखाता है आपको आपकी यात्रा कि वृतान्त । दिल्ली गेट से गोविन्दपुरी मानचित्र किराया    40 किराया    30 समय    29 min पहली    6:08 आख़री    0:00 गोविन्दपुरी सिर्फ प्रश्न पुछ्ती है कहाँ आना जाना है ।इसी कि सामने खडे होकर पुछु माई गोविन्दपुरी आप ठिक हो ।आपको पता है इन्द्रप्रस्थ नगरी तो बहुत ब्यस्त है ,भिड को एक पहचान तो दो। क्या आप भी माई ऐसे हि खडी हो ।वो बोलि दिनभर मै देखु भिड को रातको ओखला कि जंगल से आती शान्त पवन और रेल कि गुन्ज काफी है मुझे आवाज देने के लिए ।मै होकर बिभोर रहती मगन इसी गुन्ज मै ।

दिल्ली

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कहते है दिल का रिस्ता हमेसा जुबानपे  झलकता नही ,ये ऐसे लम्हे सरोजता है जो यादगार रह्ते है जिन्दगि को हसिन बनाने के लिए ।दिल्ली  कि आवाज गिरीनगर बन के गिरीनगर जो गित सुनाती है वो लाजवाफ है ।गिरीनगर एक ऐसा गाव जिसमे है  अलग अलग छाव धुप ,जब गली न एक के नुक्कड़ पे कोइ खडा होकर गुरुद्वारा को नमन करता है तो अर्दास आपके मन को शान्त कर देता है ,कहते  है सन्त कबिर के दोहो के जादु मे दिल्ली झुमती है और गोविन्दपुरी मार्केट मधुर संगीत मे लोट्पोत होकर ठहाके लगाती है । भिड को सम्भालती गोविन्दपुरी गुञ्जन लेके चल देती है सी आर पार्क तरफ जहाँ पे शोर मचाति भिड ठहका लगाती है पान के स्वाद के साथ फिर घुम जाति है लाजपत् नगर कि तरफ जहाँ पे खडी छोटे छोटे  रिक्सा मे वैठ कर हसते हुए लोग भिड बन जाते है दिल्वालो कि दिल्ली सजाने को ,क्यु कि इसी पल मे दिल्ली अपने आप को निहारती है ।क्यु घुम्ने जाते है लोग दिल्ली ये सवाल मेरे मन मे हमेशा उठ्ता रहा है ,जानकार लोग कहते है दिल्ली दिल्वालो कि है ,लोग मस्त मगन घुम्ते है ,छोटी छोटी बातो मे दिल्ली थिरकती है जैसे  सितार के राग दिल्ली मे मगन है...

माता कालकाजी कि जय

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मा कालकाजी ,'काली' का अर्थ है समय और काल। काल, जो सभी को अपने में निगल जाता है। भयानक अंधकार और श्मशान की देवी। वेद अनुसार 'समय ही आत्मा है, आत्मा ही समय है'। मां कालिका की उत्पत्ति धर्म की रक्षा और पापियों-राक्षसों का विनाश करने के लिए हुई है। काली को माता जगदम्बा की महामाया कहा गया है। मां ने सती और पार्वती के रूप में जन्म लिया था। सती रूप में ही उन्होंने 10 महाविद्याओं के माध्यम से अपने 10 जन्मों की शिव को झांकी दिखा दी थी। दिल्ली के कालकाजी इलाके में स्थित कालकाजी मंदिर माता काली को समर्पित है जिन्हे दुर्गा का अवतार माना जाता है। यह एक ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर है मंदिर में काले और सफेद पत्थर लगे हैं। साउथ दिल्ली स्थित कालकाजी मंदिर बेहद प्राचीन मंदिर है। ये मंदिर देश के प्राचीनतम सिद्धपीठों में से एक है। मां के भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं। कालका काली का ही दुसरा नाम है। इस मंदिर को जयंती पीठ और मनोकामना सिद्ध पीठ भी कहा जाता है। इस पीठ का अस्तित्व अनादि काल से माना गया है और हर काल में इस जगह का स्वरुप बदला है। ऐसी मान्यता है कि काली मां ने असुरों के संहार के लि...

शिव

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गिरीनगर कल्काजी दिल्ली रहो और शिव ताण्डव नृत्य दर्शन ना करो ये तो हो हि नही सकता,दरअसल, जब हम 'शिव' कहते हैं तो वह निराकर ईश्वर की बात होती है और जब हम 'सदाशिव' कहते हैं तो ईश्वर महान आत्मा की बात होती है और जब हम शंकर या महेश कहते हैं तो वह सती या पार्वती के पति महादेव की बात होती है। बस, हिन्दूजन यहीं भेद नहीं कर पाते हैं और सभी को एक ही मान लेते हैं। अक्सर भगवान शंकर को शिव भी कहा जाता है।  शिवपुराण के अनुसार भगवान सदाशिव और पराशक्ति अम्बिका (पार्वती या सती नहीं) से ही भगवान शंकर की उत्पत्ति मानी गई है। उस अम्बिका को प्रकृति, सर्वेश्वरी, त्रिदेवजननी (ब्रह्मा, विष्णु और महेश की माता), नित्या और मूल कारण भी कहते हैं। सदाशिव द्वारा प्रकट की गई उस शक्ति की 8 भुजाएं हैं। पराशक्ति जगतजननी वह देवी नाना प्रकार की गतियों से संपन्न है और अनेक प्रकार के अस्त्र शक्ति धारण करती है। वह शक्ति की देवी कालरूप सदाशिव की अर्धांगिनी दुर्गा हैं। उस सदाशिव से दुर्गा प्रकट हुई। काशी के आनंदरूप वन में रमण करते हुए एक समय दोनों को यह इच्‍छा उत्पन्न हुई कि किसी दूसरे पुरुष की सृष्टि करनी ...

गुड मोर्निंग गिरीनगर

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गुड मोर्निंग गिरीनगर ,कैसे है आप ,सुबह सुबह गर्म चाय से लेकर कुछ न कुछ नास्ता तो ब नता है ,उपर से मेरी मा को आदत है खाने मे  आयुर्बेदीक नुस्खे निकालकर बताना,जब से संसार कि बाते समझ आई है सिर्फ मा को देखा है हमेशा खाने से लेकर हर चिज सम्भालना ।चाय एक ऐसा पेयपदार्थ है जिसके पीकर ही ज्यादातर लोगों के सुबह की शुरुआत होती है.लोगों को सुबह बिस्तर छोड़ते ही सबसे पहले चाय चाहिए है. कई लोग तो बिस्तर पर लेटे  हुए ही गर्म चाय की फरमाइश करते है.ज्यादातर लोग गर्म गर्म चाय ही पीना पसंद करते है.नीबू पानी पिने की आदत बनाए. ताकि शरीर स्वस्थ और सुंदर बना रहे. मेरी मा हमेशा अपने को व्यस्त रखती है ।वह घर के सभी काम स्वयं करती हैं । सुबह सबसे पहले घर की सफाई करती हैं । भोजन स्वयं ही बनाती है और सब को प्यार से खिलाती हैं । कपड़ों को धोकर उन्हें प्रैस करके हमें पहनाती हैं ।रामायण, महाभारत आदि धार्मिक ग्रन्थों और महापुरुषों की कहानियाँ भी सुनाती हैं । उसकी सोचने समझने की शक्ति बहुत अच्छी है । घर का खर्च भी अच्छी तरह चलाती है। घर में सुबह सबसे पहले उठती है और सबको सुलाने के बाद ही सोती है । उसे स...