पाशुपत
दादि और दादि कि कहानिया सुनते सुनते चले धकाल्थोक स्यांग्जा मेरा गाऊ जी पंच्मुल है नाम जी चले चलो पाशुपत क्षेत्र शिवरात्रि आ गइ घुम घुम के मन्दिर शिव को याद करो जी चलो चलो हो जी धकल्थोक भी हो जी चले चले पाशुपत क्षेत्र स्यांग्जा भी हो जी कहत बुजुर्ग सुन भाई तामांग सेलो भी प्यारा देउरा नाच भी प्यारा चले चले धकल्थोक अब नेपाल नेपाल करते करते पर्यटन भी हो जी ये है हमारी पाशुपत चले चले अब पाशुपत